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रविवार, 19 जून 2011

शर्म!

शर्म भी आ जाए तो अब आँखें शर्मसार नही होती|
इन्हें पता है,कि अब इस हमाम में सब नंगे हैं|


2 टिप्‍पणियां:

  1. आपने तो चार चवन्नी बराबर सच्ची बात कह दी है!

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  2. आपने जो भी लिखा सच लिखा कोई संदेह नहीआपने जो भी लिखा सच लिखा कोई संदेह नही

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