ट्वीटर पर मेरा अनुसरण करें!
पास लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पास लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 29 मई 2011
गुरुवार, 9 दिसंबर 2010
कोई पास हमारे रहती है, मैं पास किसी के रहता हूँ|
इस रात को अक्सर मुझसे कई शिकायत रहती है|
मैं इससे बचना चाहता हूँ
फिर भी ये मुझे सताती रहती है|
ये मुझे चिढाती रहती है,
मैं अक्सर हीं चुप रहता हू|
इसे सताना अच्छा लगता है,
चुप रहूँ तो तो इसको लगे बुरा|
मैं हंसू तो इसको और बुरा,
ये हंसती है मेरे ऊपर ये मुझे अकेला कहती है|
मैं तो बस सहता रहता हू,
बस यही सुनाती रहती है|
पर अब कुछ दिनों से अब सच में हालत विपरीत हुआ है,
मैने रात को बतलाया की मुझे भी किसी से प्रीत हुआ है|
फिर भी इसे विश्वास नही है,
ये मुझे ही झूठा कहती है|
पर ये सच है|
इसे मेरी मुस्कुराहट झूठी लगती है,
मैं फिर भी सहता रहता हूँ|
लो सच ये है मैं बतलाता हूँ
कोई पास हमारे रहती है,
मैं पास किसी के रहता हूँ|
मैं इससे बचना चाहता हूँ
फिर भी ये मुझे सताती रहती है|
ये मुझे चिढाती रहती है,
मैं अक्सर हीं चुप रहता हू|
इसे सताना अच्छा लगता है,
चुप रहूँ तो तो इसको लगे बुरा|
मैं हंसू तो इसको और बुरा,
ये हंसती है मेरे ऊपर ये मुझे अकेला कहती है|
मैं तो बस सहता रहता हू,
बस यही सुनाती रहती है|
पर अब कुछ दिनों से अब सच में हालत विपरीत हुआ है,
मैने रात को बतलाया की मुझे भी किसी से प्रीत हुआ है|
फिर भी इसे विश्वास नही है,
ये मुझे ही झूठा कहती है|
पर ये सच है|
इसे मेरी मुस्कुराहट झूठी लगती है,
मैं फिर भी सहता रहता हूँ|
लो सच ये है मैं बतलाता हूँ
कोई पास हमारे रहती है,
मैं पास किसी के रहता हूँ|
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
